अधिकार का अर्थ एवं परिभाषा, प्रकार

अधिकार हमारे सामाजिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकताएँ हैं, जिनके बिना न तो व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और न ही समाज के लिए उपयोगी कार्य कर सकता है। वस्तुतः अधिकारों के बिना मानव जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस कारण वर्तमान समय में प्रत्येक राज्य के द्वारा …

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नागरिकता की अवधारणा

नागरिकता मनुष्य की उस स्थिति का नाम है जिसमें मनुष्यों को नागरिक का स्तर प्राप्त होता है। साधारण बोलचाल के अन्तर्गत एक राज्य में रहने वाले सभी व्यक्तियों को नागरिक कहा जाता है, किन्तु ऐसा कहना उचित नहीं है। एक राज्य में कुछ ऐसे विदेशी लोग भी होते हैं जो व्यापार या भ्रमण, आदि के …

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बहुलवाद

संप्रभुता की एकलवादी धारणा के विरुद्ध जिस विचारधारा का उदय हुआ, उसे हम राजनीतिक बहुलवाद या बहुसमुदायवाद कहते हैं। इस प्रकार बहुलवाद को संप्रभुता की अद्वैतवादी धारणा के विरुद्ध एक ऐसी प्रतिक्रिया कहा जा सकता है जो यद्यपि राज्य के अस्तित्व को बनाये रखना चाहती है, किन्तु राज्य की संप्रभुता का अन्त करना आवश्यक मानती …

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ऑस्टिन का संप्रभुता सिद्धांत

ऑस्टिन का संप्रभुता सिद्धांत संप्रभुता के वैधानिक सिद्धान्त का सर्वोत्तम विश्लेषण जॉन ऑस्टिन ने 1832 में प्रकाशित अपनी पुस्तक विधानशास्त्र पर व्याख्यान’ (Lecturers on Jurisprudence) में किया है। आस्टिन, हॉब्स और बेंथम के विचारों से बहुत अधिक प्रभावित था और उसका विचार था कि “उच्चतर द्वारा निम्नतर को दिया गया आदेश ही कानून होता है। …

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संप्रभुता की अवधारणा

संप्रभुता राज्य का एक अनिवार्य तत्व है और संप्रभुता के बिना राज्य की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। राज्य के लिए संप्रभुता का वही महत्व है जो व्यक्ति के जीवन के लिए प्राणों का कहा जा सकता है। संप्रभुता के कारण ही राज्य को अन्य समुदायों से उच्चतर स्थिति प्राप्त होती है और …

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राजनीति विज्ञान की परिभाषा, प्रकृति एवं क्षेत्र

राजनीति विज्ञान की परिभाषा, प्रकृति एवं क्षेत्र राजनीति विज्ञान का अर्थ ‘राजनीति’ शब्द की उत्पत्ति, जो अंग्रेजी शब्द ‘पॉलिटिक्स’ का पर्यायवाची है, ग्रीक शब्द पोलिस (Polis) से हुई है जिसका अर्थ है ‘नगर राज्य’। इस तरह राजनीति शब्द से जिस अर्थ का ज्ञान होता है वह नगर राज्य तथा उससे सम्बन्धित जीवन, घटनाओं, क्रियाओं, व्यवहारों …

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राजनीति विज्ञान के उपागम

राजनीति विज्ञान के उपागम को मुख्यत: निम्न दो भागों में बांटा जाता है: (A) आगमनात्मक उपागम (Inductive Approach) (B) निगमनात्मक उपागम (Deductive Approach) इन उपागमों के अतिरिक्त कुछ अन्य उपागमों का उल्लेख भी किया जाता है। ये हैं-(i) सादृश्य उपागम, (ii) वैधानिक उपागम, (iii) सांख्यिकीय उपागम, (iv) जीवशास्त्रीय उपागम (v) समाजशास्त्रीय उपागम, (vi) मनोवैज्ञानिक उपागम, …

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लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में समानताएँ

प्रशासन एक व्यापक एवं विस्तृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘वांछित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मानवीय तथा भौतिक संसाधनों का संगठन और संचालन’। यह कार्य (मानवीय और भौतिक संसाधनों को संगठित और संचालित करना) किसी एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के द्वारा भी सम्पन्न किया जा सकता है और किसी सरकारी संस्था या …

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द्वितीय विश्व युद्ध : पृष्ठभूमि, कारण व प्रभाव

  द्वितीय विश्व युद्ध : पृष्ठभूमि, कारण व प्रभाव इस शताब्दी के इतिहास में ही नहीं, बल्कि मानव जाति के इतिहास मे भी द्वितीय विश्व युद्ध का विस्फोट एक निर्णायक घटना है। अनेक इतिहासकारों का मानना है कि वास्तव में यह त्रासदी इस अहसास के लिए जरूरी है कि समस्त भूमण्डल के देशों की नियति …

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राष्ट्रीय शक्ति और तत्व

राष्ट्रीय शक्ति क्या है ? अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के विद्वानों ने राष्ट्रीय शक्ति को राष्ट्र का एक सबसे बड़ा केन्द्र बिन्दु माना है, जिसके चारों ओर उसकी विदेश नीति के विभिन्न पहलू चक्कर काटते रहते हैं। राष्ट्रीय शक्ति राष्ट्र की वह क्षमता है जिसके बल पर वह दूसरे राष्ट्रों से अपनी इच्छा के अनुरूप कोई कार्य …

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