उदारवाद (Liberalism)

 

  उदारवाद (Liberalism)

उदारवाद अंग्रेजी शब्द के Liberalism का हिंदी रूपांतरण है। Liberalism शब्द लैट्रिन के Liber से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ स्वतंत्रता या आजादी होता है। Liberty शब्द भी इसी Liber से बना है। अतः उदारवाद स्वतंत्रता के विचार का समर्थक है। मूलतः Liberal शब्द ऐसे व्यक्ति या सिद्धांत के साथ प्रयुक्त होता है जो व्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करें परंतु Liberal का अर्थ उदार, शह्रदय, शालीन , सुसंस्कृत आदि भी होता है।
एक विचारधारा के रूप में उदारवाद का उदय सामंतवाद के पतन के साथ शुरू होता है। इसने राजनीति को बाजार अर्थव्यवस्था के अनुरूप ढालने का प्रयत्न किया। प्रारंभ में तो इसने व्यक्ति को राजनीति का केंद्र मानकर व्यक्तिवाद को बढ़ावा दिया परंतु बाद में इसने राजनीति में समूहों की भूमिका को स्वीकार करके बहुलवाद को अपना लिया। इसी तरह इसने प्रारंभ में मुक्त बाजार व्यवस्था को समानहित का साधन मानते हुए हस्तक्षेप की नीति का सम्मान किया , परंतु आगे चलकर कल्याणकारी राज्य का सिद्धांत अपना लिया।

उत्पत्ति : इतिहासकारों के अनुसार ब्रिटिश राजनीतिक दार्शनिक जॉन लॉक (1632-1704) उदारवाद के जनक के रूप में जाना जाता है और 1628 ईस्वी की रक्त हीन या गौरवमयी क्रांति को उदारवाद की विजय के रूप में याद किया जाता है। लांक ने सबसे पहले जीवन , स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार को मनुष्य का प्राकृतिक अधिकार मानते हुए तर्क दिया कि इन्हीं अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार की स्थापना एक ट्रस्ट अर्थात न्यास के रुप में की जाती है। अतः सरकार अपने इस दायित्व से बंधी होती है और यदि वह अपने इस दायित्व को पूरा करने में विफल रहती है तो जनता को अपनी सरकार के विरुद्ध विद्रोह का अधिकार मिल जाता है।
उदारवाद मुख्य रूप से 2 विषयों पर जोड़ देता है एक तो यह निरंकुश सत्ता को अस्वीकार करके उसकी जगह मनुष्य की स्वतंत्रता पर आधारित व्यवस्था स्थापित करने का लक्ष्य सामने रखता है और दूसरा यह व्यक्ति के व्यक्तित्व की स्वतंत्र अभिव्यक्ति की मांग करता है। इनमें से एक उदारवाद का व्यवहारिक पक्ष है और दूसरा दार्शनिक पक्ष।

विकास: 14वी शताब्दी में यूरोप का पुनर्जागरण आंदोलन (इटली के फ्लोरेंस नगर से शुरू होकर यूरोप के विभिन्न देशों में फैल गया) ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में चर्च के अधिकार का अंत कर दिया और राजनीति के क्षेत्र में मानवतावाद और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया।
16वीं शताब्दी में यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन हुआ जिसका नेतृत्व जर्मनी के किंग मार्टिन लूथर (1683- 1546) ने किया। लूथर ने यह तर्क दिया कि मोक्ष प्राप्ति का साधन केवल आस्था और धर्म ग्रंथों का पालन नहीं है। इस आंदोलन के फलस्वरूप एक नए धर्म प्रोटेस्टेंट का उदय हुआ जिसने कैथोलिक चर्च के अनन्य अधिकार को चुनौती दी।
16-17 वी सदी की वैज्ञानिक क्रांति ने सत्य के अनुसंधान के लिए वैज्ञानिक विधि को प्रोत्साहन दिया। 18वीं सदी के ज्ञानोदय (बौद्धिक क्रांति) में वाल्टेयर , रूसो , मांटेस्क्यू , एडम स्मिथ , कांट , टॉमस पेन आदि विचारकों का योगदान था। इन्होंने इस विचार को बढ़ावा दिया कि मनुष्य के तर्क बुद्धि या विवेक , जीवन के किसी क्षेत्र में सत्य का पता लगाने का सर्वोत्तम साधन है।
वैज्ञानिक क्रांति के परिणाम स्वरुप मशीन और औद्योगिक क्रांति ने प्राचीन कृषि व्यवस्था को उद्योग प्रधान व्यवस्था में बदल दिया। जिससे एक मध्य वर्ग (व्यावसायिक वर्ग) का उदय हुआ। इस वर्ग ने स्वतंत्रता और समानता का नारा बुलंद किया जिससे राजनीति बाजार व्यवस्था की तरफ मुड़ गई।
उपरोक्त घटनाओं ने उदारवाद के उद्भव और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जे. लास्की के शब्दों में , “वस्तुतः उदारवादी परंपरा के जन्म की व्याख्या एक ही तरह से की जा सकती है वह इस तरह कि इसके जन्म के साथ साथ आर्थिक शक्ति एक वर्ग के हाथों से निकल कर दूसरे वर्ग के हाथों में चली गई थी” पहले यह शक्ति उच्च वर्गीय जमींदारों के हाथों में होती थी अब यह मध्यवर्गीय व्यापारियों के हाथों में आ गई थी। लास्की आगे कहता है कि “ऐतिहासिक तथ्य है कि उदारवादी परंपरा एक बौद्धिक क्रांति थी और इसका प्रमुख उद्देश्य नए औद्योगिक क्षेत्र में संपत्ति के स्वामियों के हितों की रक्षा करना था।”

राज्य के कार्यों के संबंध में उदारवाद की दो शाखाएं हैं परंपरागत और आधुनिक । इन दोनों धाराओं के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिलता है। परंपरागत उदारवाद में हस्तक्षेप की नीति और व्यक्तिवाद को प्रमुखता दी जाती थी। अतः इसे नकारात्मक उदारवाद कहा जाता है, जबकि आधुनिक उदारवाद में व्यक्तियों के कल्याण के लिए राज्य की सकारात्मक भूमिका पर बल दिया जाता है अतः इसे सकारात्मक उदारवाद कहा जाता है। परंपरागत उदारवाद के समर्थक एडम स्मिथ , बेंथम जे. एस. मिल , हर्बर्ट स्पेंसर आदि हैं , जबकि जान स्टुअर्ट मिल ने प्रारंभ में व्यक्तिवाद का समर्थन किया , परंतु बाद में राज्य की नकारात्मक भूमिका को सकारात्मक भूमिका में बदलने का प्रयत्न करके आधुनिक उदारवाद को बढ़ावा दिया। आधुनिक उदारवाद के प्रवर्तकों में जे. एस. मिल के अलावा टी. एच. ग्रीन , एल. टी. हाबहाउस , मैकाइवर , लांस्की आदि हैं।

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