हॉब्स की अध्ययन पद्धति: वैज्ञानिक भौतिकवाद

हॉब्स पर अपने समय में होने वाली वैज्ञानिक खोजों का बड़ा प्रभाव था। इस प्रभाव के कारण उसने अपने युग की राजनीतिक समस्याओं के अध्ययन के लिए अपने से पूर्ववर्ती विचारकों की अध्ययन पद्धति से बिल्कुल भिन्न अध्ययन पद्धति का प्रयोग किया। उसने न तो मध्ययुग के प्रचलित धार्मिक ग्रन्थों पर आधारित प्रमाणवादी पद्धति और न बोदां जैसे लेखकों के द्वारा प्रयुक्त ऐतिहासिक पद्धति का प्रयोग किया। इसके विपरीत, हॉब्स ने वैज्ञानिक भौतिकवाद की दृष्टिकोण को अपनाया जो पूर्णतः तार्किक और बुद्धिवादी दृष्टिकोण था।

वास्तव में हॉब्स वैज्ञानिक सिद्धान्तों के आधार पर एक सम्पूर्ण दर्शन की रचना करना चाहता था और राजनीतिक दर्शन उसके इस सम्पूर्ण चिन्तन का एक अंग मात्र था। हॉब्स के इस सम्पूर्ण दर्शन को ही भौतिकवाद (Materialism) कहा गया है। यद्यपि हॉब्स ने गणित और भौतिक विज्ञान का पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं किया था, पर उसने उस साध्य को अवश्य समझ लिया था जिसकी ओर प्राकृतिक विज्ञान बढ़ रहा था। ‘गैलिलियो के युग में हॉब्स राजनीति का गैलिलियो था।” गैलिलियो की भांति हॉब्स ने ‘पुराने विषय में से एक विज्ञान को जन्म दिया।’ यह नया विज्ञान गति का था। इस विज्ञान के अनुसार भौतिक संसार पूर्ण रूप से एक यान्त्रिक व्यवस्था है। हॉब्स सम्पूर्ण संसार को एक यांत्रिक व्यवस्था कहता है। हॉब्स का मानना है कि इसमें घटित समस्त क्रियाएँ एक-दूसरे से सम्बन्ध रखने वाले पदार्थों की गतिशीलता के कारण घटित होती हैं। हॉब्स का विश्वास है कि मनुष्य विशाल विश्व का एक सूक्ष्म प्रतिबिम्ब है। इसलिए भौतिक जगत् की तरह मनुष्य भी एक यन्त्र है। हॉब्स के अनुसार सामाजिक जीवन का स्वरूप भी गतिशीलता के सिद्धान्त के आधार पर ही समझा जा सकता है। हॉब्स के दर्शन का उद्देश्य यह था कि मनोविज्ञान तथा राजनीति को विशुद्ध प्राकृतिक विज्ञानों के धरातल पर प्रतिष्ठित किया जाए। उसने मनोविज्ञान तथा राजनीति में इसी पद्धति का प्रयोग किया है।

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वैज्ञानिक भौतिकवाद (Scientific Materialism) का शाब्दिक अर्थ दो पद्धतियों का सम्मिश्रण है। वैज्ञानिक शब्द का अर्थ है—व्याख्या, कार्य-कारण सम्बन्ध (Causes and Effect Relationship), व्यवस्था और निष्कर्ष निकालने की प्रवृत्ति और हॉब्स में हम यह सब पाते हैं। वह इन्हीं आधारों पर अपने राजदर्शन का निर्माण करता है। उदाहरणार्थ, वह सर्वप्रथम मानव स्वभाव और उसके चरित्र का अध्ययन करता है उसकी भावना, इच्छा, विचारों का विश्लेषण करता है और तभी वह इस परिणाम पर आता है कि इस प्रकार के प्राणी के साथ व्यवहार करने तथा उसके कार्यों को नियन्त्रित करने के लिए राज्य को कैसा होना चाहिए। वह समझौते द्वारा राज्य की उत्पत्ति बतलाता है पर इसके पूर्व एक प्राकृतिक अवस्था का चित्रण भी करता है जिसके पश्चात् नागरिक समाज का निर्माण आवश्यक हुआ था। इस प्रकार हॉब्स व्यवस्थित और क्रमागत आधार पर सर्वप्रथम मानव स्वभाव का विश्लेषण, फिर प्राकृतिक कानून, तत्पश्चात् प्राकृतिक अवस्था और अंत में समझौते द्वारा राज्य का निर्माण करता है।

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भौतिकवाद शब्द का अर्थ है कि धार्मिक अन्धविश्वासों, नैतिकता और ईश्वर में विश्वास आदि से पृथक वास्तविक वस्तु-जगत है। वह वातावरण में विश्वास करता है और उसके दर्शन में व्यक्ति को वातावरण से अधिक महत्व देता है। भौतिकवादियों के अनुसार हॉब्स इन अर्थों में पूर्णतया भौतिकवादी है। वह व्यक्ति को अधिक महत्व देता है। उसके मनोविज्ञान के कारण ही समझौते और शक्तिशाली राजतन्त्र की स्थापना होती है। हॉब्स का विश्वास था कि संसार में पदार्थ के अतिरिक्त और कुछ भी सत्य नहीं है और जो कुछ प्रकृति अथवा पदार्थ नहीं है, वह विश्व का अंग नहीं है। सेबाइन के अनुसार ” हाॅब्स पूर्णतः भौतिकवादी था और उसके लिए आध्यात्मिक सत्ता केवल काल्पनिक वस्तु मात्र थी।”

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