न्याय का सिद्धांत-प्लेटो

प्लेटो ने तत्कालीन समय में प्रचलित सभी न्याय के सिद्धांतों का खंडन किया है तथा उन पर चर्चा करके अपना नया सिद्धांत विकसित किया जिसका विवरण निम्नलिखित है –
1. – न्याय और कुछ नहीं बस यह सिद्धांत है कि व्यक्ति को केवल वही कार्य करनी चाहिए जिसके लिए वह प्रकृति द्वारा उपयुक्त बनाया गया है। प्रकृति ने मनुष्य को 3 शासकों के अधीन रखा है – इच्छा(desire) , भावना ( emotion) और ज्ञान या बुद्धि knowledge or intellect) । इच्छा का स्थान मनुष्य की कमर में है, भावना का स्थान हृदय में और ज्ञान का स्थान मस्तिष्क में है। वैसे ये सभी गुण सभी मनुष्यों में पाए जाते हैं परंतु किसी मनुष्य में किसी गुण की प्रधानता रहती है किसी में किसी और की। इस आधार पर प्लेटो ने समाज को तीन वर्गों में विभाजित किया है – जिनमें इच्छा की प्रधानता होती है, वे लोग उद्योग व्यापार को तत्पर होते हैं, जिनमें भावना की प्रधानता होती है, वह सैनिक या योद्धा का व्यवसाय अपनाते हैं और जो ज्ञान से संपन्न होते हैं वह दार्शनिक के रूप में ख्याति अर्जित करते हैं। यदि हम मनुष्य की प्रकृति के लिए उपयुक्त सद्गुण निश्चित कर ले तो राज्य के लिए उपयुक्त सद्गुण निश्चित करना आसान हो जाएगा। प्लेटो ने चार मूल सद्गुणों का विवरण दिया है। इच्छा के लिए उपयुक्त शब्द गुण संयम (temperance) है। अतः उद्योग व्यापार में संलग्न वर्ग को जद्जीवन की प्राप्ति के लिए अपने अंदर संयम विकसित करना चाहिए। भावना या मनोवेग के लिए उपयुक्त सद्गुण साहस(courage) है। अतः सैनिक वर्ग को सद्जीवन बिताने के लिए अपने अंदर साहस विकसित करना चाहिए। ज्ञान के लिए उपयुक्त सद्गुण विवेक(wisdom) है। दार्शनिक या बुद्धिजीवी वर्ग को इस गुण का विकास करना चाहिए। चौथा या अंतिम सद्गुण न्याय ( justice) है जो कि सर्वोच्च सद्गुण है। यह समस्त सद्गुणों के उपयुक्त सहयोग का सूचक है, अर्थात व्यक्ति के संदर्भ में न्याय से तात्पर्य यह है कि तृष्णा को साहस क संबल मिल जाए और विवेक से मार्गदर्शन प्राप्त हो।

2. न्याय का अर्थ विशेषज्ञता और उत्कृष्टता है।
3. न्याय व्यक्तियों को समाज में रहने में सहायता करता है। यह एक बंधन है जो समाज को एक साथ रखता है। यह व्यक्तियों का एवं राज्य के विभिन्न वर्गों का एक व्यवस्थित संगठन है।
4. न्याय सार्वजनिक एवं निजी सद्गुण दोनों है। इसका लक्ष्य व्यक्ति का तथा सारे समाज का लाभ करना होता है।

निष्कर्ष
प्लेटो का न्याय का सिद्धांत श्रम विभाजन, विशेषज्ञता और कार्यकुशलता की ओर ले जाता है। उसकी न्याय की धारणा में एक सामाजिक अच्छाई, एक निजी और सार्वजनिक नैतिकता और नैतिक निर्देश निहित है। फिर भी प्लेटो का न्याय सिद्धांत इस अर्थ में एकदलीय है क्योंकि यह व्यक्ति को सत्ता के अधीन रखता है।

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