Theory of checks and balances ( नियंत्रण एवं संतुलन सिद्धांत )

 

Theory of Checks and Balances ( नियंत्रण एवं संतुलन सिद्धांत)

 

शक्तियों का पृथक्करण न तो संभव है और न ही उचित। शासन के विभिन्न अंगों का पारस्परिक संबंध उपयोगी और आवश्यक है। इस बात को दृष्टि में रखते हुए वर्तमान समय में शक्ति पृथक्करण सिद्धांत ने एक नवीन रूप ग्रहण कर लिया है जिसे ‘नियंत्रण एवं संतुलन सिद्धांत’ के नाम से जाना जाता है। नियंत्रण एवं संतुलन सिद्धांत का आशय है कि सरकार के विभिन्न अंग एक दूसरे की शक्ति पर इस प्रकार से नियंत्रण स्थापित रखें कि शक्तियों का संतुलन बना रहे और कोई भी एक विभाग निरंकुशता का प्रयोग न कर सके।

अमेरिकी शासन व्यवस्था नियंत्रण एवं संतुलन सिद्धांत पर ही आधारित है। अमेरिकी व्यवस्थापिका जिन कानूनों का निर्माण करती है, कार्यपालिका प्रधान उन पर निशेषाधिकार का प्रयोग कर सकता है और न्यायपालिका उन्हें असंवैधानिक घोषित कर सकती है। इसी प्रकार कार्यपालिका प्रधान द्वारा की गई नियुक्तियों और संधियों पर व्यवस्थापिका के उच्च सदन सीनेट द्वारा नियंत्रण रखा जाता है और संविधान के विरुद्ध होने पर सर्वोच्च न्यायालय इन कार्यों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है। व्यवस्थापिका न्यायाधीशों पर महाभियोग लगा सकती है और कार्यपालिका प्रधान द्वारा क्षमादान की न्यायिक शक्तियों का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि अमेरिका में सरकार के तीनों अंग एक दूसरे की शक्तियों को नियंत्रित करते हैं और इस प्रकार विभिन्न विभागों के बीच एक ऐसा संतुलन स्थापित हो जाता है कि सरकार का कोई भी अंग निरंकुशतापूर्ण आचरण नहीं कर सकता। यही व्यवस्था नियंत्रण एवं संतुलन सिद्धांत का उदाहरण कहा जा सकता है।

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